UPSC(PRE)

विशेष : हमारी शिक्षण पद्धति चारित्रिक उत्थान के साथ तीन उत्तरोत्तर प्रक्रिया(क्या,कितना एंव कैसे) पर आधारित है। जिसके कि विषय वस्तु को छात्र अच्छी तरह आत्मसात कर सके। हम अपने छात्रों पर अध्ययन थोपते नहीं है अपितु उनकी निजता का सम्मान करते है। ऐसा इसलिए कि प्रत्येक छात्र की अलग व समझ होती है।

1. फाउंडेशन बैच (प्रारंभिक ,मुख्य परीक्षा)

मुख्य विशेषताएं :
एक वर्षीय पाठ्यक्रम :

  • सामान्य अध्ययन (प्रारंभिक व मुख्य) पर विशेष अधय्यन एंव सम्पूर्ण अधययनसामग्री।
  • सीसैट पर विशेष अधय्यन एंव सम्पूर्ण सामग्री ।
  • सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा परिवर्तित के अनुरूप विशिष्ट अधय्यन एंव सामग्री।
  • टेस्ट श्रीखला (प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा), विभिन्न प्रकार के टेस्ट (टापिक आधारित टेस्ट, विषय आधारित टेस्ट एंव माक टेस्ट)
  • नियमित परीक्षा के साथ परिचर्चा । 100 प्रतिशत अधतन अधय्यन सामग्री।
  • व्यक्तिगत संदेश निवारण एंव मार्गदर्शन की सुविधा।

2. प्रारंभिक परीक्षा(सामान्य अधय्यन , सीसैट)

  • 6 माह की विस्तृत कक्षा योजना ।
  • साप्ताहिक नियमित जांच परीक्षा ।
  • समसामयिक मुददों तथा घटनाओं पर साप्ताहिक कक्षा ।

सामान्य अध्ययन :

  • विषय की मौलिक समझ विकास कर विषय वस्तु के प्रति छात्रों मे स्वाभाविक दिलचस्पी पैदा करना ।
  • विभिन्न विषयों(भूगोल, संविधान, अर्थव्यसथा, विज्ञान एंव तकनीकी) के परस्पर संबंधों की समझ पैदा करना ताकि छत्रों मे रचनात्तमक एंव विश्लेषण परक सोच विकसित हो सके ।
  • समसामयिक राष्ट्रीय एंव अंतराष्ट्रीय मुददों को दैनिक एंव साप्ताहिक विकास के रूप मे देखना तथा परंपरागत विषयों से  जोड़कर टापिक को पूर्णता प्रदान करना

सीसैट :

यह कम्प्रीहेंसन, गणित, तर्कशक्ति परीक्षण अंत वैयक्तिक कौशल से जुड़े प्रश्नों का पुलिंदा नहीं है, अपितु यह एक दृष्टि है। इस दृष्टि के लिए उर्वर भूमि तैयार करती है, आलोचनात्मक सोच। हमारे संस्थान का आधारभूत बल आलोचनात्मक सोच के विकास पर होता है, तत्पश्चात नियमित एवं कठिन कार्य पर।

3. मुख्य परीक्षा (सामान्य अध्ययन, भाषा, निबंध, वैकल्पिक विषय)

यूपीएससी एवं सीजीपीएससी के नए पाठ्यक्रम पर आधारित:
वैकल्पिक विषय :

लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, इतिहास, हिन्दी, साहित्य, भूगोल,सामान्य अध्ययन, निबंध एवं वैकल्पिक विषय सहित 1800 अंको का सम्पूर्ण समाधान। छात्रों की रचनात्मक सोच एवं लेखनशैली विकसित करना। निरंतर अभ्यास पर बल ताकि ज्ञान एवं अभिव्यक्ति के बीच खाई को पाटा जा सके। प्रत्येक विषय संबंधी सत्र का आरंभ पाठ्यक्रम के मूल से होता है। मात्र ज्ञान के आधार पर आईएएस परीक्षा मे सफलता प्राप्त करना लगभग असंभव है, लेखन कौशल हेतु प्रस्तुति का समग्र प्रबंधन समान रूप से महत्वपूर्ण है, इसलिए हम लेखन शैली के विकास एवं समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हैं।